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इसरो ने एक साथ 104 उपग्रह प्रक्षेपित कर रचा इतिहास

 

श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार सुबह एक साथ 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक उनकी कक्षा में स्थापित कर इतिहास रच दिया। इसमें देश का पृथ्वी अवलोकन उपग्रह काटरेसैट-2 भी शामिल है। उपग्रहों का प्रक्षेपण भारतीय रॉकेट ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के जरिये किया गया।

 

इस प्रक्षेपण के साथ ही इसरो ने रूस को पीछे छोड़ दिया है। रूस ने 19 जून 2014 को एक साथ 37 उपग्रह प्रक्षेपित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

 

जिन उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया है, उनमें 101 नैनो उपग्रह हैं, जिनमें से इजरायल, कजाकस्तान, नीदरलैंड्स, स्विट्जरलैंड व संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक-एक और अमेरिका के 96 तथा भारत के दो नैनो उपग्रह शामिल हैं।

 

इन सभी उपग्रहों का कुल वजन लगभग 1,378 किलोग्राम है।

 

पीएसएलवी यान से एक साथ कई उपग्रह प्रक्षेपित करना इसरो के लिए नया कारनामा नहीं है। इसरो ने इससे पहल भी 22 जून 2016 को 20 उपग्रह प्रक्षेपित किए थे।

 

इसरो के अध्यक्ष ए.एस.किरण कुमार ने सफल प्रक्षेपण के लिए टीम को बधाई देते हुए कहा, “104 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया गया।”

 

44.4 मीटर लंबे और 320 टन वजनी रॉकेट पीएसएलवी-एक्सएल ने सुबह 9.28 बजे उड़ान भरी।

 

काटरेसैट-2 उपग्रह का वजन 714 किलोग्राम है और यह पांच वर्षो तक काम करेगा।

 

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी इस सफलता पर इसरो को बधाई दी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने भी इसरो को बधाई दी।

 

रॉकेट मिशन नियंत्रण कक्ष में इसरो वैज्ञानिक अपनी कंप्यूटर स्क्रीन पर टकटकी लगाकर इतिहास बनते देख रहे थे।

 

लगभग 28 मिनट की उड़ान के बाद पीएसएलवी ने सफलतापूर्वक सभी 104 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर दिया।

 

इसरो के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करते हुए आईएएनएस से कहा, “काटरेसैट उपग्रह पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के काटरेसैट-2 श्रृंखला का चौथा उपग्रह है। इस श्रृंखला के तीन उपग्रह पहले ही पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किए जा चुके हैं और दो अन्य का प्रक्षेपण किया जाना है। काटरेसैट-2 श्रृंखला के सभी छह उपग्रहों को प्रक्षेपित किए जाने के बाद काटरेसैट-3 श्रृंखला के उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जाएगा।”

 

परियोजना निदेशक जयकुमार ने बताया कि पीएसएलवी रॉकेट से अब तक जिन 226 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जा चुका है, उनमें से 179 उपग्रह विभिन्न देशों के हैं।

 

सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) के निदेशक पी.कुन्हीकृष्णन के मुताबिक, इस साल तीन और प्रक्षेपण किए जाने हैं।

 

इसरो ने बुधवार को एक साथ 104 उपग्रहों का प्रक्षेपण कर इस संबंध में रूस का रिकॉर्ड तोड़ दिया। रूस ने 19 जून, 2014 को एक साथ 37 उपग्रह प्रक्षेपित किए थे।

 

मोदी ने ट्वीट कर कहा, “भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को पीएसएलवी-सी37 और 103 नैनो उपग्रहों के साथ काटरेसैट उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करने के लिए बधाई।”

 

राष्ट्रपति मुखर्जी ने इसरो को चेयरमैन ए.एस.किरण कुमार के नाम संदेश में कहा कि 15 फरवरी की तारीख देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम इतिहास में एक कीर्तिमान के रूप में दर्ज हो जाएगी।

 

सोनिया ने एक बयान में कहा, “भारत ने अंतरिक्ष और वैज्ञानिक उपलब्धियों के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन किया है और हमारे वैज्ञानिकों के इस कदम से एक बार फिर हमारा देश गौरवान्वित हुआ है।”

 

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने बुधवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधन संगठन (इसरो) द्वारा 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने पर बधाई देते हुए कहा कि इस उपलब्धि से भारतीय विज्ञान क्षेत्र की झलक दर्शाता है।

 

उन्होंने कहा, “पूरा देश हमारे वैज्ञानिकों पर गौरवान्वित है। हमने इतिहास रच दिया है। पूरा विश्व अब विज्ञान और प्रौद्योगिकी से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भारत की ओर देख रहा है और यह ‘वसुधव कुटुंबकम्’ का दर्शन है।”

–आईएएनएस

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