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कचरा मुक्त शहरों के लिए स्टार रेटिंग प्रणाली पर पहली क्षेत्रीय कार्यशाला का मिनाक्षी लेखी ने किया उद्घाटन

नई दिल्ली: कचरा मुक्‍त शहरों के लिए स्‍टार रेटिंग प्रणाली पर पहली क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन आज यहां आवास और शहरी विकास मंत्रालय की ओर से नई दिल्‍ली नगरपालिका परिषद् (एनडीएमसी) के सहयोग से किया गया। कार्यशाला का उद्धाटन मंत्रालय के सचिव श्री दुर्गा शंकर मिश्रा की उपस्‍थिति में सांसद श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने किया। इस अवसर पर एनडीएमसी के अध्‍यक्ष श्री नरेश कुमार तथा स्‍वच्‍छ भारत मिशन (शहरी) के निदेशक वीके जिंदल भी मौजूद थे। श्रीमती लेखी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि शहरों से बड़ी मात्रा में निकलने वाले कचरों के निपटान के लिए विकेन्‍द्रीकृत समन्‍वित प्रयास होने चाहिए। उन्‍होंने शहरों को कचरा मुक्‍त बनाने में आमलोगों के सहयोग को जरूरी बताते हुए साफ सफाई के नियमों के उल्‍लंघन के मामलों में कड़े दंड के प्रावधान पर भी जोर दिया।

श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा कि वार्षिक स्वच्छ सर्वेक्षण गतिविधि के साथ, कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग पूरे देश के शहरों के बीच स्वच्छता के लक्ष्य और 100% ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लक्ष्‍य को प्राप्त करने के लिए एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनाएगी। एक दिवसीय इस कार्यशाला में नई दिल्ली, जम्मू और कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के 250 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों के महापैार और आयुक्‍तों सहित अनेक अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला का आयोजन आवास और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा कचरा मुक्‍त शहरों के लिए शुरू की गयी नयी स्‍टार रेटिंग प्रणाली के बारे में राज्य और शहर के अधिकारियों और अन्य संबंधित हितधारकों को अवगत कराने तथा तथा प्रणाली के अनुकूल उनमें क्षमता विकास के लिए किया गया। यह प्रणाली ठोस कचरा प्रबंधन के लिए एक  समग्र मूल्यांकन प्रणाली की तरह है।

स्‍वच्‍छ भारत मिशन (शहरी) के दो प्रमुख लक्ष्‍य हैं – पहला सभी 4041 कस्‍बों और शहरों को खुले में शौच से मुक्ति करना ठोस अपशिष्‍ट का वैज्ञानिक प्रबंधन। ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को प्रोत्‍साहित करने तथा शहरों को स्‍वच्‍छता के बारे में सजग बनाने के लिए आवास और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्‍टार रेटिंग प्रणाली की शुरूआत 20 जनवरी, 2018 को की गई थी।

स्‍टार रेटिंग प्रणाली कड़े मानकों और लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए किये जाने वाले प्रयासों (स्‍मार्ट) पर आधारित है। यह भारत के शहरों में साफ-सफाई का आकलन करने के लिए अपने किस्‍म की सबसे प्रभावी प्रणाली है। 12 कड़े मानकों पर आधारित यह प्रणाली शहरों के बीच टिकाऊ और स्‍वच्‍छता के उच्‍च मानदंडों को हासिल करने के लिए एक स्‍वस्‍थ्‍य प्रतिस्‍पर्धा को बढ़ावा देगी। आज आयोजित कार्यशाला कचरा मुक्‍त भारत की दिशा में किये जा रहे प्रयासों के तहत जून 2018 तक देश के सभी राज्‍यों में आयोजित की जाने वाली 17 कार्यशालाओं में से पहली थी।

कचरा मुक्त शहरों की स्‍टार रेटिंग – स्‍टार रेटिंग प्रणाली के मानक

यह 12 मानकों पर आधारित एकल मैट्रिक रेटिंग प्रणाली है

  1. घर घर जाकर कचरे का संग्रहण
  2. स्रोत पृथक्‍करण
  3. सार्वजनिक व्‍यावसायिक और रिहायशी इलाकों में सफाई
  4. कचरा डालने के लिए कूडेदानों और कचरा उठाने के लिए सुविधाओं की व्‍यवस्‍था।
  5. बडी मात्रा में कचरा निकालने वालों के लिए नियम
  6. कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण, वैज्ञानिक भूमि भराव, निर्माण और विध्वंस प्रबंधन
  7. कचरा फैलाने पर जुर्माना तथा प्‍लास्टिक के इस्‍तेमाल पर रोक को लागू करना।
  8. जन शिकायत निवारण तथा फीड बैक प्रणाली।
  9. खराब तरीके से कचरे की डंपिंग से मुक्ति
  10. बडे नालों और जल स्रोतों की सफाई
  11. कचरे में कमी लाना
  12. शहरों का सौन्‍दर्यीकरण

स्‍मार्ट अवधारणा पर आधारित 7 स्‍टार रेटिंग प्रणाली की मुख्‍य विशेषताएं

एकल मैट्रिक आधारित प्रणाली – प्‍लास्टिक कचरे, ठोस कचरे के साथ ही नालों और जल स्रोतों में बहाये जाने वाले अपशिष्‍टों के आधार पर रेटिंग

  • प्रत्‍येक मानक इस आधार पर तय किये गये हैं ताकि शहरों द्वारा साफ सफाई के लक्ष्‍य को हासिल करना व्‍यवहारिक रूप से आसान हो सके।.
  • मानकों के अनुपालन के लिए कडी शर्तें रखी गई हैं  और इनकी समीक्षा भी सख्‍त तरीके से करने की व्‍यवस्‍था है।
  • मानक इस आधार पर तय किये गये हैं ताकि इनका अनुपालन लक्ष्‍यों की प्राप्ति को आसान बना सके।

स्‍टार रेटिंग प्रणाली का महत्‍व

यह प्रणाली इस तरह डिजाइन की गई है जिससे शहर धीरे धीरे 7 स्‍टार वाले मॉडल शहर के रूप में विकसित हो सकें और उनमें साफ सफाई की पूरी व्‍यवस्‍था हो।

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