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कबड्डी के बाद खाली नहीं बैठता, किसान हूं ना : सचिन

 

मुंबई| वीवो प्रो-कबड्डी लीग के सीजन-5 में शामिल हुई नई टीम गुजरात फार्च्यूनजायएंट्स के लिए महत्वपूर्ण रेडर के रूप में उबर कर आए सचिन का कहना है कि कबड्डी से अलग खाली एक किसान के लिए नहीं होता।

सचिन ने आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि वह कबड्डी के अलावा अपने परिवार के साथ खेती करते हैं।

कबड्डी के बाद खाली समय बिताने के बारे में पूछे जाने पर सचिन ने कहा, “मेरे माता-पिता की ओर से मुझे कबड्डी खेलने के लिए पूरा समर्थन मिलता है। बावजूद इसके वह गांव जाकर अपने परिवार के साथ खेती करते हैं।”

सचिन राजस्थान के झुंझनू जिले के बड़बर गांव के निवासी हैं। उनके गांव की आबादी केवल 3,000 के करीब है।

रोमांचक बात यह है कि सचिन 2016 में कप्तान की भूमिका मे जूनियर एशियन चैम्पियनशिप खेले चुके हैं और उन्होने भारत को स्वर्ण पदक भी दिलाया। हालांकि, पहचान उन्हें कबड्डी लीग ने दी।

उन्होंने कहा, “भले ही उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें वह पहचान नहीं मिली, जो उन्हें कबड्डी लीग से मिली।”

कबड्डी लीग के बारे में सचिन ने कहा, “मुझे लीग में खेलकर बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे शुरू में थोड़ा डर लग रहा था कि अच्छा खेल पाउंगा या नहीं, लेकिन अब मैं सहज हूं।”

सचिन ने कहा कि वह कबड्डी को शुरू से देखते आ रहे हैं। अखिल भारतीय कबड्डी टूनार्मेंट में सचिन ओएनजीसी टीम की ओर से खेलते हैं।

लीग में गुजरात के लिए अब तक खेल गए 10 मैचों में सचिन ने 116 रेड मारी हैं, जिसमें से 46 सफल रही हैं। इसके अलावा, उन्होंने 10 टैकल किए हैं और छह में सफलता हासिल की हैं। उन्होंने अब कुल 57 रेड और सात टैकल अंक हासिल किए हैं।

सचिन ने कहा कि लीग में दो बार खिताब जीतने वाली पटना पाइरेट्स उनकी टीम को अच्छी टक्कर दे सकती है।

गुजरात जोन-ए में शामिल है और अब तक खेले गए 10 में से सात मैच में उसने जीत हासिल की है और उसके दो मैच ड्रॉ हुए हैं। उसे केवल एक मैच में हार का सामना करना पड़ा है। सचिन हरियाणा की कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बी.ए में दूसरे वर्ष के छात्र हैं। हालांकि, उनकी अधिक रुचि कबड्डी में ही है। वह अनूप को अपना आदर्श मानते हैं। उनका कहना है कि वह यू-मुंबा के कप्तान अनूप का खेल देखते रहते हैं।

सचिन राष्ट्रीय स्तर में राजस्थान की टीम से खेलते हैं। उन्होंने कहा कि अपने बड़े भाई से उन्हें कबड्डी खेलने की प्रेरणा मिली। हालांकि, उन्होंने शुरूआत में कुश्ती खेली थी लेकिन इसके बाद कबड्डी की ओर रुख कर लिया।

उन्होंने कहा, “मेरे बड़े भाई दीपक कुमार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में काम करते हैं। उनका चयन लीग के दूसरे सीजन में बंगाल वॉरियर्स की टीम के लिए हुआ था, लेकिन चोटिल होने के कारण वह लीग में पदार्पण नहीं कर पाए।”

सचिन ने कहा कि नीलामी के दौरान वह जयपुर में चोगान स्टेडियम में अकेले बैठे थे। उन्हें गुजरात में चुने जाने की खबर उनके दोस्तों से मिली। उन्हें 36 लाख में गुजरात में शामिल किया गया। हालांकि, वह अपनी रकम के साथ क्या करेंगे, उन्होंने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है।

लीग को लेकर सचिन के सपने बड़े हैं। मिजाज से शमीर्ले सचिन को अभी और भी आगे जाना है। उनका लक्ष्य एशियाई खेलों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करना है। हालांकि, वह जानते हैं कि इसके लिए बहुत मेहनत करनी है और इसके लिए वह तैयार हैं।

–आईएएनएस

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