Crime

छग : बेंगलुरू में बंधक बने 36 बैगा आदिवासी छुड़ाए गए

कवर्धा: बेहतर रोजगार और कमाई के लालच में दलाल के चंगुल में फंसकर जिले के बैगा आदिवासी परिवार बेंगलुरू की पल्प नाम की जूस बनाने वाली कंपनी में चार महीने से बंधक थे। इन बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया। 

जिले के एसपी डॉ. लाल उमेद सिंह व कलेक्टर अवनीश शरण ने त्वरित कार्यवाही करते बंधकों को छुड़ा कर लाने टीम बना कर बेंगलुरू भेजा। टीम ने ताबड़ तोड़ कार्यवाही करते हुए दलाल के लुका छिपी के खेल के बावजूद बैगा जनजाति के 36 लोगों को 27 जून की रात सुरक्षित कवर्धा ले आई। प्रशासन ने उन्हें बेहतर रोजगार, बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का वादा भी किया है।

बंधकों में संरक्षित बैगा जनजाति के 36 लोगों में मासूम बच्चे भी शामिल हैं। चार महीने पहले पल्प नाम की जूस बनाने वाली कम्पनी ने इन सभी लोगों को 10 हजार रुपये मासिक वेतन देने का लालच देकर बेंगलुरू ले जाकर बंधक बना लिया था। मामले की जानकारी होने पर एसपी व कलेक्टर ने श्रम, महिला बाल विकास विभाग व पुलिस विभाग की टीम गठित कर बेंगलुरू रवाना किया और 6 दिन बाद सभी को सुरक्षित लाया गया।

बंधक बने लोगों ने बताया कि काम के बदले इन लोगों को सिर्फ खाने के लिए ही दिया जाता था। महिलाओं को उसके बच्चों से दूर रखकर उनसे जबरदस्ती काम कराया जाता था। ऐसा नहीं करने पर ठेकेदार इनके साथ मारपीट करते थे। आज आजाद हो कर राहत की सांस ले रहे है और दुबारा काम के लिए बाहर नहीं जाने की बात कही। मजदूरों को ले जाकर बंधक बनाने वाला ठेकेदार यूपी का रहने वाला पप्पू फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी है।

कवर्धा जिले के पंडरिया ब्लाक के वनांचल गांव अमनिया के बैगा जनजाति के लोगों ने कुछ दिन पहले जिला मुख्यालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई थी कि बेंगलुरू के पल्प नाम से जूस बनाने वाली कंपनी के ठेकेदारों ने 36 महिला पुरुष व बच्चों को चार महीने से जबरदस्ती बंधक बना रखा है, जिसके बाद गठित टीम ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर खोज शुरू की। कर्नाटक में ही पहाड़ों से घिरे चिल्लूर में सभी बंधक मिले, जिन्हें एक बडे कंपाउंड में बैरकनुमा स्थान में रखा गया था। बंधकों को छुड़वाने गई रेस्क्यू टीम ने मजदूरों को मजदूरी का पूरा पैसा भी दिलवाया है, जो 5 लाख 64 हजार रुपये है।

इन आदिवासियों में से सजन बाई वहां से भागने कामयाब हो गई थी, जिसकी सूचना के बाद ही प्रशासन हरकत में आया था। विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति के लोगों को इस तरह से काम की तलाश में पलायन करना शासन-प्रशासन के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

–आईएएनएस

Show More
Close

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker