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राष्ट्रपति ने हिंदी दिवस के अवसर पर राजभाषा पुरस्कार प्रदान किये

 

नई दिल्ली। राष्ट्रपति  राम नाथ कोविंद ने हिंदी दिवस के अवसर पर  नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में राजभाषा पुरस्कार प्रदान किये। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने ‘लीला मोबाइल एप’ जारी किया जिससे हिन्दी सीखने की ऑनलाइन सुविधा लोगों को मिलेगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस और आचार्य काका कालेलकर की अपनी भाषाएं गुजराती, बंगला और मराठी थीं। लेकिन उन महापुरुषों ने हिन्दी भाषा में देश को जोड़ने की ताकत को पहचाना था। स्वतन्त्रता आंदोलन के दौरान इन महापुरुषों के नेतृत्व में वर्धा में राष्ट्र भाषा प्रचार समिति की स्थापना की  गई थी।

विदेशी मूल के विद्वानों द्वारा हिन्दी की सेवा करने के अनेक उदाहरण हैं।  बेल्जियम में जन्मे फादर कामिल बुल्के का ‘अंगरेज़ी हिन्दी कोश’ सबसे अधिक लोकप्रिय है। हिंदी भाषा के महान लेखक मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ हर भारतीय भाषा में उपलब्ध है और पढ़ी जाती है। सचमुच में उनकी कहानियों में पूरा भारत बसता है।

सभी भारतीय भाषाओँ को सहयोग और समानता के साथ आगे बढ़ाना हम सब की जिम्मेदारी है। जब कोई हिंदी भाषी दूसरी भाषा बोलने वाले भाई-बहनों का वणक्कम, सत-सिरी-अकाल, आदाब, या मुरब्बी से अभिवादन करता है, तो उसी पल भाषा, भावना और सम्मान के स्तर पर उन्हें जोड़ लेता है।

हमारे देश में वकील और डाक्टर की भाषा अधिकतर लोगों को समझ में नहीं आती है। लेकिन अब धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है। कुछ राज्यों में कोर्ट-कचहरी में हिन्दी में बहस करने का चलन बढ़ा है और फैसले भी हिन्दी में दिये जाने लगे हैं। इसी तरह यदि डाक्टर अँग्रेजी के साथ-साथ अपने परामर्श को देवनागरी लिपि में या स्थानीय लिपि में लिखने लगें तो मरीज और डाक्टर के बीच की दूरी घटेगी। यह बदलाव देखने में सामान्य लगता है लेकिन प्रभाव में गहरा होगा। यही तरीका अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।

राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि हिन्दी अनुवाद की नहीं बल्कि संवाद की भाषा है। किसी भी भाषा की तरह हिन्दी भी मौलिक सोच की भाषा है। मुझे इस बात की खुशी है कि आज सरकार के कर्मचारियों तथा नागरिकों को मौलिक पुस्तक लेखन के लिए पुरस्कार दिये गये हैं।

नये तथा तकनीकी शब्दों को बिना अनुवाद किए अपनाया जा सकता है। ‘रेलवे स्टेशन’ और ‘रजिस्टर’ जैसे शब्द बिना किसी अनुवाद के बरसों पहले हिन्दी में घुल-मिल गये थे। उसी प्रकार अनेक नए शब्दों को भी हिन्दी भाषा में मिला लेना चाहिए। अन्यथा ऐसे शब्दों के हिन्दी अनुवाद से भाषा की सहजता कम होती है। शब्दावली तैयार करने में स्पष्टता और सरलता होनी चाहिए। सरलता के साथ-साथ हिन्दी भाषा के प्रयोग में एकरूपता लाने से अधिक सुविधा होगी।

भाषा का आधार बचपन में ही मजबूत बनता है। स्कूली शिक्षा की हिन्दी के स्वरूप पर निरंतर काम होना चाहिए। हिन्दी में अच्छे बाल साहित्य का विशाल भंडार उपलब्ध हो, साथ ही विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट बालोपयोगी पुस्तकों का बड़े पैमाने पर प्रकाशन हो, यह जरुरी है।

साथ ही विदेशों में हिन्दी सीखने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। अनेक देशों में लगभग 175 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है।

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