दिल्ली

वंदे मातरम के साथ शुरू हुआ “11वें दिल्ली अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव”

 

एस.पी. चोपड़ा, नई दिल्ली। भारत का सबसे बड़ा कला एवं संस्कृति महोत्सव दिल्ली अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव (डीआईएएफ) का रंगारंग शुभारंभ शनिवार को दिल्ली के ऐतिहासिक पुराना किला परिसर में बड़ी ही धूमधाम से हुआ। उद्घाटन के इस सुनहरे अवसर पर देश-विदेश के तमाम कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से समा बांधा। इस अवसर पर प्रसिद्धा डांस रेपर्टरी- भारत के तरफ से (वंदे मातरम) की प्रस्तुति प्रतिभा प्रहलाद द्वारा कोरिओग्राफ कर किया गया।

वंदे मातरम एक बहु-शैली के नृत्य का उत्पादन है, एक निर्बाध उत्पादन में ध्यान, योग, संगीत और नृत्य की अवधारणा को जोड़ता है जो हमारे मातृभूमि को श्रद्धांजलि देता है। यह एक अनोखा नृत्य उत्पादन है जो अपनी मर्यादित और असीम रूपों में माँ और मातृभूमि को सलाम करता है। मातृभूमि भारत को श्रद्धांजलि देने के दौरान, वंदे मातरम  शाश्वत माता के विभिन्न पहलुओं – काली, तारा, सोदसी, भुवनेश्वरी, चिन्नमस्तिका, भैरवी, मातंगी, बागलामयी और कमला को चित्रित करते हैं।

इसके साथ ही विदेशी कलाकारों में ताईवान के तरफ से (हू ड्रिंक्स देयर?) ताई बाडी थियेटर द्वारा कंट्मेपररी डांस की प्रस्तु पेश की गई जो कि वातन तुसी द्वारा कोरिओग्राफ  किया गया। अर्जेंटिना द्वारा साइरस थियेटर। यूएसए और ताइवान द्वारा फ्यूजन डांस। रूस द्वारा कंट्मेपररी फ्यूजन डांस। इजिप्ट द्वारा फोल्कोरिक एंड डेरविश डांस के साथ शुरू हुआ। इस बार भी लोगो में इस उस्तव को देखने का उत्साह कम नहीं हुआ जिसके चलते करीब हजारों की तादात मे आये दर्शको ने उत्सव का जमकर लूत्फ उठाया साथ तालिओं के कलाकारों का स्वागत किया।

दिल्ली इंटरनेशनल आर्ट्स फेस्टिवल की संस्थापक प्रतिभा प्रहलाद ने कहा कि दिल्ली आर्ट्स फेस्टिवल दुनिया के प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय महोत्सवों में से एक है। इस फेस्टिवल में हम कला के पारंपरिक, लोक, शास्त्रीय एवं आधुनिक रूपों को एक ही मंच पर पेश करते हैं। तभी तो दिल्ली कला महोत्सव दुनिया के प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय कला महोत्सवों के समकक्ष है। हमारा मानना है कि सौंदर्यशास्त्र को देशों के द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसलिए हमारा मानना है कि हर किसी को कला गहरे तक छूता है और कला ही हमें अपनी असली पहचान देता है।

दो सप्ताह तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव के कार्यक्रम राजधानी के पुराना किला, कुतुबमीनार, सेंट्रल पार्क, सिविल सर्विस ऑफिसर्स इंस्टिट्यूट,आईजीएनसीए ऑडिटोरियम, कमानी सभागार, इंडिया हैबीटेट सेंटर, बीकानेर हाउस जैसे 25 अलग-अलग इलाकों और स्थान में आयोजित किए जा रहा हैं।

दिल्ली अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव के कलाकार राजधानी के डेढ़ दर्जन स्कूलों का दौरा भी करेंगे और स्कूली बच्चों के बीच सांस्कृतिक ज्ञान और सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगे। इस दौरान स्कूली बच्चों को देश-दुनिया की विरासतों, सांस्कृतिक मूल्यों, परंपाराओं की जानकारी जान सकेंगे। खास बात यह है कि इस बार महोत्सव में ‘सवच्छता ही सेवा’ को मूल अवधारणा के तौर पर शामिल किया गया है।

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