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Film Review: न्यूटन का दमदार संदेश..लोकतंत्र सिर्फ बटन तक नहीं..

 

एस.पी. चोपड़ा, 

एक नौजवान और आदर्शवादी न्यूटन उर्फ नूतन कुमार (राजकुमार राव) किताबों पर चलने में विश्वास करता है। वो एक लड़की से शादी इसलिए नहीं करता क्योंकि वो अभी 18 साल की नहीं हुई है। सरकार उसे पीठासीन अधिकारी बनाकर छत्तीसगढ़ के पिछड़े इलाके में भेज देती है जहां माओवादियों से बेफिक्र है जो वहां किसी भी हाल में मतदान नहीं होने देना चाहते हैं।

लेकिन न्यूटन की सबसे बड़ी चिंता है कि वो गांव के 76 लोकल लोगों का वोट रजिस्टर करे। उसकी टीम में एक लोकर शिक्षिका माल्को (अंजली पाटिल), कर्ल्क (रघुवीर यादव) हैं। इन सबके बीच न्यूटन की ड्यूटी आत्मा सिंह (पंकज त्रिपाठी) के साथ लगती है जो सिक्योरिटी टीम का हेड है और न्यूटन की बातों को ज्यादा नहीं मानता। देखना ये है कि न्यूटन के लिए यह राह कितनी आसान होगी। ऊसूलों के पक्के न्यूटन के साथ वहां क्या-क्या होता है? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

अमित मसुरकर का निर्देशन बेहतरीन है। लोेकेशन, सिनेमैटोग्राफी भी कमाल की है। सरकारी कर्मचारी के रोल में राजकुमार राव ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ऐक्टिंग का दम दिखाने के लिए बड़े बैनर और बड़े बजट की फिल्मों की ज़रूरत नहीं होती है।

वोटिंग और इलेक्शन जैसे मुद्दों को गहराई से लेकिन मनोरंजक अंदाज़ में पेश किया गया है। पुलिस अफसर के रोल में पंकज त्रिपाठी ने बेहतरीन काम किया है। रघुबीर यादव, अंजलि पाटिल और संजय मिश्रा ने भी अपने अभिनय की छाप छोड़ी है।

फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक काफी शानदार है। ‘चल तू अपना काम कर ले’ फिल्म के क्रेडिट में है जिसके लिरिक्स बहुत खूबसूरत हैं। अगर आप राजकुमार राव के फैन नहीं भी हैं, तो इस फिल्म को देखने के बाद आप उनकी ऐक्टिंग के कायल हो जाएंगे। इसके अलावा अगर आप कुछ अलग विषय पर फिल्म देखने के शौक़ीन हैं तो ये फिल्म आपके लिए ही है।

#स्टारकास्ट: राजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी, रघुवीर यादव, अंजलि पाटिल और संजय मिश्रा

#डायरेक्टर: अमित मसुरकर

#प्रोड्यूसर: मनीष मुंद्रा

#लेखक: अमित मसुरकर, मयंक तिवारी

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